मानसून 2026 की क्षेत्रीय असमानता और गहराता भूजल संकट: जानें UPSC के लिए मुख्य बिंदु
1. चर्चा में क्यों? (Why in News?)
वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) के दौरान भारत के विभिन्न हिस्सों में बारिश के पैटर्न में भारी क्षेत्रीय असमानता (Regional Disparity) देखी जा रही है। जहाँ कुछ राज्यों में अत्यधिक बारिश से बाढ़ के हालात हैं, वहीं देश के कई महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्रों में कम वर्षा के कारण भूजल स्तर (Groundwater Level) में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। इसने भारत की शहरी और ग्रामीण जल सुरक्षा पर एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
2. UPSC सिलेबस से जुड़ाव (Syllabus Linkage)
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1): विश्व के भौतिक भूगोल की मुख्य विशेषताएँ (मानसून तंत्र), महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताएं (जल-निकाय)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, जल-स्मार्ट कृषि (Water-smart agriculture) और संसाधन प्रबंधन।
3. भूजल संकट के मुख्य कारण (Core Reasons)
- मानसून की अनिश्चितता: जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण मानसून के दिनों की संख्या कम हो रही है, लेकिन कम समय में अत्यधिक तीव्र बारिश (High-intensity rainfall) हो रही है, जिससे पानी जमीन के अंदर रिसने (Recharge) के बजाय बह जाता है।
- अत्यधिक दोहन (Over-exploitation): भारत दुनिया में भूजल का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। हमारी कृषि व्यवस्था मुख्य रूप से ट्यूबवेल और बोरवेल पर निर्भर है।
- पारंपरिक जल निकायों का नष्ट होना: तालाबों, झीलों और आर्द्रभूमियों (Wetlands) के अतिक्रमण के कारण प्राकृतिक रूप से भूजल का पुनर्भरण रुक गया है।
4. आगे की राह और समाधान (Solutions)
- जल-स्मार्ट कृषि (Water-smart Agriculture): धान और गन्ने जैसी अत्यधिक पानी सोखने वाली फसलों के बजाय मोटे अनाज (Millets) और कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देना।
- अटल भूजल योजना का विस्तार: सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से भूजल प्रबंधन को मजबूत करना।
- शहरी वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): शहरों में कंक्रीट के फैलाव को नियंत्रित करना और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाना।
📌 प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice MCQ)
प्रश्न: भारत में भूजल प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई 'अटल भूजल योजना' (Atal Bhujal Yojana) को निम्नलिखित में से किस वैश्विक संस्था द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है?
(A) एशियाई विकास बैंक (ADB)
(B) विश्व बैंक (World Bank)
(C) न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB)
(D) अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)
(A) एशियाई विकास बैंक (ADB)
(B) विश्व बैंक (World Bank)
(C) न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB)
(D) अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)
सही उत्तर: (B) विश्व बैंक (World Bank)
- व्याख्या: अटल भूजल योजना भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की एक केंद्रीय योजना है, जिसे विश्व बैंक के सहयोग से देश के अत्यधिक भूजल दोहन वाले राज्यों में सामुदायिक नेतृत्व वाले प्रबंधन के लिए लागू किया जा रहा है।
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न (Mains Practice Question)
प्रश्न: "जलवायु परिवर्तन के दौर में मानसून की क्षेत्रीय असमानता भारत की जल सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती है। देश में भूजल के गिरते स्तर को रोकने के लिए संस्थागत और तकनीकी उपायों की चर्चा कीजिए।" (150 शब्द, 10 अंक)
📝 मॉडल उत्तर (Model Answer):
भूमिका:
हालिया मानसून 2026 के आंकड़ों से स्पष्ट है कि वर्षा के बदलते पैटर्न और अत्यधिक दोहन के कारण भारत का भूजल संकट गहराता जा रहा है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने इतिहास के सबसे गंभीर जल संकट से जूझ रहा है।
हालिया मानसून 2026 के आंकड़ों से स्पष्ट है कि वर्षा के बदलते पैटर्न और अत्यधिक दोहन के कारण भारत का भूजल संकट गहराता जा रहा है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने इतिहास के सबसे गंभीर जल संकट से जूझ रहा है।
आवश्यक उपाय:
- संस्थागत उपाय (Institutional Measures):
- फसल विविधीकरण (Crop Diversification): किसानों को कम पानी वाली फसलों (जैसे बाजरा, दलहन) की खेती के लिए प्रोत्साहित करना।
- सामुदायिक प्रबंधन: 'अटल भूजल योजना' की तर्ज पर ग्राम पंचायतों को जल सुरक्षा योजनाएं बनाने के लिए वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार देना।
- तकनीकी उपाय (Technical Measures):
- सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation): पानी की बर्बादी रोकने के लिए ड्रिप (टपकन) और स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई तकनीक का अनिवार्य उपयोग।
- आर्टिफिशियल रिचार्ज (Artificial Recharge): अनुपयोगी पड़े कुओं और बोरवेलों को वर्षा जल संचयन प्रणाली से जोड़कर भूजल को कृत्रिम रूप से रिचार्ज करना।
निष्कर्ष:
जल सुरक्षा केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं बल्कि भारत की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता से जुड़ा विषय है। इसके लिए "प्रति बूंद अधिक फसल" (More Crop Per Drop) के मंत्र को धरातल पर उतारना अनिवार्य है।
जल सुरक्षा केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं बल्कि भारत की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता से जुड़ा विषय है। इसके लिए "प्रति बूंद अधिक फसल" (More Crop Per Drop) के मंत्र को धरातल पर उतारना अनिवार्य है।
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